Friday, April 18, 2014

Is this Love?


Just tried penning down thoughts of a Young Boy, who is confused if ‘he was indeed in love’. 

चाँद से भी पूछा एक बार मैने,
क्या तुझें देखूँ या अपना यार.
चाँद भी मुस्कुराया और बोला मुझसे,
तरसता हूँ मैं भी उसका दीदार.

एक तेरी ही मुस्कुराहट है जो,
मुझे ग़म सारे भुला देती है.
तेरी एक पलकें झुकाने की अदा,
इस दिल को तेज़ धड़का देती है.

प्यार से जब तुम पुकारते हो,
एक अरमान सा दिल में जगता है.
कह तो दूँ यह तुमसे में,
पर डर सा दिल में लगता है.

रब्ब से मांग लूँ तुझको मैं,
ऐसा दिल चुपके से कहता है.
सीने में रहता था कभी मेरे,
अब जाने कहाँ वो रहता है.

धड़कता था पहले कभी चुपचाप से,
वो कुछ समय से खो गया है.
क्या प्यार इसी को कहते हैं,
जो मुझको शायद हो गया है.

रहता था अपनी दुनिया में बेखबर,
अब सपनों की नगरी में खो गया है
क्या प्यार इसी को कहते हैं,
जो मुझको शायद हो गया है.

He is still searching for an answer. Do you have one for him?
Reactions:

6 comments:

  1. Yes it is................................ :-)
    Now go and tell him.

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    1. sure. you advice will b communicated to him .:)

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  2. kya pyaar isi ko khte hain jo mujhko shayad ho gaya hai......
    thz r the only thoughts on my mind these days...... relatable lines..

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    1. U are quite lost in the thoughts of love, clearly visible since you even forgot mentioning your name here. :)

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  3. ye pyaar hai ke nahin pata nahin, par usne tumhe saayar bana diya, etna pata hain...

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    1. haha.. the writing was purely fictional. :)
      anyways, this comment gave me a topic to write, and my latest post is what it finally came out to be. :)
      Hope you like it.

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