Friday, July 11, 2014

Friendship is Life!!

In the journey of sharing and caring, my world has become richer with all those lovely people who care for my happiness and smile. I just tried penning down my thoughts this time for how rich I feel but at the same time, a bit scared of losing them.



सबसे खास, दोस्ती का एहसास
चुप रहना ज़िंदगी की आदत हो गई,
बातों से दिल ना दुखा दूँ, किसीका डर लगता है.
दोस्ती करते हैं हम लोगों का दिल देखकर,
किसी दोस्त का साथ छूट ना जाये डर लगता है.
एक पतली सी माला पिरोई है ज़िंदगी में अपनी,
वो छन्न से टूट ना जाये डर लगता है.
एक वादा चाहिए तुमसे ज़िंदगी भर की दोस्ती का,
"वादे अक्सर टूटते है." इसी बात से डर लगता है.
जाने कल क्या उजाला हो अपनी ज़िंदगानी में,
आज को आज में जीना ही हमें प्यारा लगता है.
खुशनसीब है वो जिन्हें मिलता है साथ दोस्तो का,
खुशनसीब होने का ख्याल यह हमें बहुत प्यारा लगता है.
दोस्ती की है तो निभाने की कोशिश भी होगी,
हमारी दोस्ती का एहसास ही मुझे सबसे प्यारा लगता है. 




These lines are dedicated to all my Tom and Jerry friends. I hope you like it. :)

Monday, June 23, 2014

Kya Dilli Kya Lahore!!

Last Saturday, I attended an event by Zee to launch their new channel ‘Zindagi’ and what pushed me to attend the event was the very tagline of the Channel : Zindagi, Jodey Dilon Ko. An attempt aimed at connecting two nations, I was quite excited for the launch event, since even we have grown up watching Pakistani Plays and Pakistani shows on PTV.
While sitting in the hall, I penned down a few lines on the issue and I hope you all would like it.



क्या दिल्ली, क्या लाहौर!!
हम आज भी उमर शरीफ देख हॅसते हैं,
दिलों में उनके भी शाहरुख बस्ते हैं.
हुआ करती थी मंज़िल एक कभी यह,
आज अलग अलग हुए ह्‌मारे रास्ते हैं.

हम एक थे इतिहास के किस्सों में,
क्यूँ बाँट दिया हमें दो हिस्‍सों में,
क्या कोई मुझे यह समझायेगा,
क्या फर्क है इन दो हिस्सों में.

ज़मीन को अलग कर दिया हो चाहे,
पर खुश्बू मिट्टी की ना जुदा हो पाये.
नहीं है फ़ासला लाहौर अमृतसर में,
तो दिलों में फ़ासले कैसे हो पाये.

यह हवायों की मासूमियत के भी क्या कहने,
जब चलती हैं यह अमृतसर में शोर से,
ना यह देखे ना जाने कोई सरहद,
चुनरी उड़ती जाये लाहौर में.

मुझे भी हवा का झोंका बना दो यार,
मैं भी देख लूँ उधर का प्यार,
उस ज़मीन की मिट्टी को लगाना है माथे,
मुझको भी दिखा दो कोई लाहौर एक बार.

कभी कभी सोचे यह मन मेरा,
सियासत के खेल में देश लुट गया मेरा,
मेरे मन की यह कुछ ख्वाहिशें है,
इस बारें में बता, क्या ख्याल है तेरा.

क्यूँ ना इन दो भाइयों को फिर से मिलायें,
क्यूँ ना हम इक नया जहाँ बनायें,
बीती हुई कड़वी यादों को भूल,
हम अमन की आशा चारो और फैलायें.

आओ प्यार के दिये जला दें चारो और,
बांटें इतना प्यार, जिसका ना हो कोई छोर.
अब दो देशों की दूरियाँ मिट जाने दो,
क्या हो दिल्ली, क्या लाहौर.
अब दिलों की दूरियाँ मिट जाने दो,
क्या हो दिल्ली, क्या लाहौर.



While I sincerely hope that this new channel will be a step forward, let us vow too for a cordial Indo-Pak relationship. 

Tuesday, June 10, 2014

Loving beyond Social Barriers!!


Condemn Honour Killing, just coz there is no honour in Killing.


A couple of days back, I came across a news clipping regarding 'honour killing' and all the thoughts within my mind came to halt. I tried penning down a story of two lovers, who loved beyond the social barriers, but may not unite due to the artificial social barricades.

रात बहुत है हो चली,
हम घूमे यादों की गली.
जब मैं और तुम बने थे हम,
खुशियाँ जो थी कभी ना कम.
ज़िंदगी की हर खुशी तुझसे ही थी,
तेरी हर आरज़ू की तमन्ना हमने की.
तेरी मुस्कुराहट की चाहत हर पल थी,
झुकी तेरी नज़र और दिल में हलचल थी.
तेरे होने से एक अजब सा एहसास था,
पर इस रिश्ते का नाम हर पल राज़ था.

आया जब वक़्त इस रिश्ते को नाम देने का,
तब इकरार से ना जाने यह दिल घबराया.
मुझे प्यार है तुमसे कहते कहते,
तुमने इस रिश्ते का नाम दोस्ती बताया.
पर जाने क्या मजबूरी रही होगी तुम्हारी,
फिर एक दिन तुमने इस दोस्ती को भी ठुकराया.
बेवफाई तुम्हारी ना होगी तुम्हारी मंज़ूरी से,
यही कहके फिर हमने अपने दिल को समझाया.

आज मिले जब फिर से उन्हीं राहों पे,
तो पढ़ ली हमने यह आँखें तुम्हारी.
मुझे आज भी प्यार है तुमसे,
कह गयी हमसे यह साँसें तुम्हारी.

इस इज़हार की खुशी तो थी दिल में,
पर एक सवाल ज़रूर मन में आया था..
तुम दूर गये थे मुझसे क्यूँ,
यह आज भी ना तुमने बताया था..
जब हम थे एक साथ, प्यार था तब भी,
फिर तब तुमने ना क्यूं प्यार जताया था..
जब मालूम था के ज़िंदगी कटेगी ना बिन तेरे,
फिर क्यूँ जान बूझके मुझे सताया था..

यह सुनके वो बस इतना ही कह पायी थी,
तेरी खातिर ही हमने यह ज़िंदगी ठुकराई थी.
तुमसे प्यार करना खिलाफ था समाज के उसूलों के,
तुझे इन्कार करके ही हमने अपनी वफ़ा निभाई थी.

यह सुनके हमने अपनी ज़िन्दगी को गले लगाया,
विश्वास हमारा ना टूटा, यह सूकून पाया.
एक वो वक़्त था और एक आज है,
इस प्यार के बीच क्यूँ आता समाज ह..
इंसानों में क्यूँ छोटा बड़ा बनाया,
एक दूसरे के बीच क्यूँ फ़ासला बनाया.

चाहे दर्मियाँ हो जितनी मरज़ी दूरियाँ,

हमें दूर ना कर पायेंगी यह मजबूरियाँ.
नहीं भूलेंगे हम किये एक दूसरे से वादे,
मर कर भी ज़िंदा रहेंगे हम इश्क़ज़ादे.

I hope you like it. :)



Sunday, May 04, 2014

The Unspoken Words!!

I have been receiving lots of positive feedback and comments on my writings and in between the comments are some questions asking about what is the source of inspiration for these writings. The question gave me another reason to write on why I write. But while I started writing, the lines started going far from my reply on why I write, but still, they were communicating the thoughts of several others who write to express the unspoken words, words which will always remain unspoken otherwise.


हमें अब नींद की तलब नहीं रही,
अब रातों को जागना अच्छा लगता है.
एक यादें ही तो है तेरी साथ मेरे,
उन यादों को संजोना अच्छा लगता है.
जाने क्या जादू किया तेरी मुस्‍कुराहट ने,
फूलों सा तेरा मुस्कुराना अच्छा लगता है.
वो मेरा तुझे सताना और तेरा रूठ जाना,
फिर मेरा तुझे मनाना अच्छा लगता है.
दिल करे करू बातें तेरी आँखों से,
तू हो सामने तो नज़रें झुकाना अच्छा लगता है.
शेरो-शायरी में कर लेता हूँ बातें तेरी,
शायद तभी ये शायरी करना अच्छा लगता है.
मुझे मालूम नहीं तू मेरी किस्मत में है या नहीं,
मगर तुझे खुदा से माँगना अच्छा लगता है.
शेरो-शायरी में कर लेता हूँ बातें तेरी,
शायद तभी ये शायरी करना अच्छा लगता है.

I hope you like it. :) 

Friday, April 18, 2014

Is this Love?


Just tried penning down thoughts of a Young Boy, who is confused if ‘he was indeed in love’. 

चाँद से भी पूछा एक बार मैने,
क्या तुझें देखूँ या अपना यार.
चाँद भी मुस्कुराया और बोला मुझसे,
तरसता हूँ मैं भी उसका दीदार.

एक तेरी ही मुस्कुराहट है जो,
मुझे ग़म सारे भुला देती है.
तेरी एक पलकें झुकाने की अदा,
इस दिल को तेज़ धड़का देती है.

प्यार से जब तुम पुकारते हो,
एक अरमान सा दिल में जगता है.
कह तो दूँ यह तुमसे में,
पर डर सा दिल में लगता है.

रब्ब से मांग लूँ तुझको मैं,
ऐसा दिल चुपके से कहता है.
सीने में रहता था कभी मेरे,
अब जाने कहाँ वो रहता है.

धड़कता था पहले कभी चुपचाप से,
वो कुछ समय से खो गया है.
क्या प्यार इसी को कहते हैं,
जो मुझको शायद हो गया है.

रहता था अपनी दुनिया में बेखबर,
अब सपनों की नगरी में खो गया है
क्या प्यार इसी को कहते हैं,
जो मुझको शायद हो गया है.

He is still searching for an answer. Do you have one for him?

Saturday, April 12, 2014

Strongly Against #BackingRapists


Wednesday, April 09, 2014

Ab ki Baar, Kiski Sarkar??

It's Election Season in India these days. While all the news channels are busy giving their bit of breaking news related to Elections, there is something even we, the Voters, need to do to make this whole exercise a success. The whole last week and the running week, office talks have been centred around what all will be done on the 'Official Holiday' on the Voting Day in Delhi NCR, April 10. All the talks have different agenda, but the main agenda, voting, lacks a mention out there. I tried penning down a few lines to urge Voters to vote:

अब की बार, किसकी सरकार??













दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र,
हर किसी की अलग अलग राय है.
कहीं युवराज का भाषन यहाँ,
तो कहीं नमो की चाय है.

झाड़ू बजना शुरू हुआ अब,
लालटेन भी यहाँ जलती है.
हाथी ऊपर बहुत हुई सवारी,
साइकल भी खूब अब चलती है.

बदले की राजनीति हैं सब करते,
इन सबमें इनको महारत है.
बिगड़ा कुछ नहीं इन नेताओं का,
बर्बाद हुआ यह भारत है.

जब तक ना हो यहाँ मतदान,
करलो तब तक दर्शन इनके भरपूर.
पाँच साल फिर दिखेंगे ना यह,
रहेंगे अपने चुनाव क्षेत्र से दूर.

जीवन की यह विडंबना देखो,
कुर्ता सफेद पर दिल काले हैं.
लेकर जाओ अपने दर्द पास इनके,
तो इन लोगों के दिलों पे ताले हैं.

हर नेता पे करके भरोसा,
कितने धोखे हैं हमने खाये.
तिजोरियाँ इनकी भर्ती रहें बस,
जनता रहे रोती चाहे चिल्लाये.

होती हर वोट की है अहमियत पूरी,
अब वोट करने के लिये भागो रे.
मतदान दिवस की छुट्टी मना ली बहुत,
भारत के युवा, अब तो जागो रे.

बहुत सह लिये है घाव भारत ने,
हो हमारा नारा यही इस बार,
उठो, जागो और वोट करो सब,
लेकर है आनी लोकतंत्र की सरकार.

वोट करना है जिम्मेदारी हमारी ,
वोट करेंगे हम ज़रूर इस बार.
है नये भारत की आवाज़ नयी,
अब की बार, लोकतंत्र की सरकार.


I will vote. Will you?